Tuesday, July 3, 2012

वेद क्या हैं


वेद के आधीन क्या क्या है व् वेद का रूप क्या है
वेद का बीज अक्षर व् है जो की स्मृति भी कहलाता है। व् व्यक्त व्यंजन है उ स्वेर का, जो की परा जीव्चेतना का केन्द्र तीसरी आंख का ( आज्ञा चक्र) का बीजाक्षर है।
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कुण्डलिनी का रहस्य क्या है ? / What is the mystery behind the power of Kundlini?


कुण्डलिनीके चक्र : कुंडलिनी शक्ति समस्त ब्रह्मांड में परिव्याप्त सार्वभौमिक शक्ति है जो प्रसुप्तावस्था में प्रत्येक जीव में विद्यमान रहती है। इसको प्रतीक रूप से साढ़े तीन कुंडल लगाए सर्प जो मूलाधार चक्र में सो रहा है के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। तीन कुंडल प्रकृति के तीन गुणों के परिचायक हैं। ये हैंसत्व (परिशुद्धता), रजस (क्रियाशीतता और वासना) तथा तमस (जड़ता और अंधकार)। अर्द्ध कुंडल इन गुणों के प्रभाव (विकृति) का परिचायक है।We moved to www.astroswami.in

Sunday, July 1, 2012

भारतीय संस्कृति में स्वास्तिक का चिन्ह क्या है ? / What is the Symbol of Swastik in Hindu Culture

आर्यप्रतीक “स्वस्तिक” का प्रयोग क्योँ और वैज्ञानिकता क्या?
(1)”अर्थ और निहित विश्वबन्धुत्व एवं कल्याण”:-
स्वस्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में मंगल-प्रतीक माना जाता रहा है। इसीलिए किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले स्वस्तिक चिह्व अंकित करके उसका पूजन किया जाता है। स्वस्तिक शब्द सु+अस+क से बना है। ‘सु’ का अर्थ अच्छा, ‘अस’ का अर्थ ‘सत्ता’ या ‘अस्तित्व’ और ‘क’ का अर्थ ‘कर्त्ता’ या करने वाले से है। इस प्रकार‘स्वस्तिक’ शब्द का अर्थ हुआ ‘अच्छा’ या ‘मंगल’ करने वाला। wemoved to www.astroswami.inभारतीय संस्कृति में स्वास्तिक का चिन्ह क्या है ? / What is the Symbol of Swastik in Hindu Culture

Friday, June 29, 2012

अंक ज्योतिष क्या है ? / What is Numerology ?


अंकज्योतिष क्या है? ( What is Numerology )

अंकज्योतिष अंकों की सहायता से भविष्यवाणी करने का विज्ञान है। अंकज्योतिष के माध्यम से मनुष्य की भविष्य जानने की मूलभूत इच्छा की पूर्ति होती है।

अंकज्योतिष में गणित के नियमों का व्यवहारिक उपयोग करके मनुष्य के अस्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर नजर डाली जा सकती है।.

वास्तव में अंकज्योतिष में We moved to http://www.astroswami.in/2012/06/25/अंक-ज्योतिष-क्या-है-what-is-numerology

ज्योतिष और आपके शिशु की शिक्षा / Astrology and the Education of your Children

आज के समय में सभी विद्यार्थी  अपनी शिक्षा का स्तर उच्च रखने की कामना रखते हैं.और अभिभावक भी अपने बच्चो की शिक्षा को लेकर चिन्तित रहते हैं. प्राचीन समय में ब्राह्मण का कार्य शिक्षा प्रदान करना था. विद्यार्थीगण आश्रम में रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे. लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में काफी We moved tohttp://www.astroswami.in/2012/06/27/ज्योतिष-और-shikshaज्योतिष-और-आपक

सावन में भगवान शिव /महादेव की उपासना कैसे करनी चाहिए / How to worship Lord Shiv / Mahadev in the month of Sawan

सावन के माह में शिवभक्त अपनी श्रद्धा तथा भक्ति के अनुसार शिव की उपासना करते हैं. चारों ओर का वातावरण शिव भक्ति से ओत-प्रोत रहता है. सावन माह में शिव की भक्ति के महत्व का वर्णन ऋग्वेद में किया गया है. श्रावण मास के आरम्भ से ही पूजा का आरम्भ हो जाता है. इस माह में भगवान की पूजा करने में निम्न मंत्र जाप करने चाहिएWe moved to. http://www.astroswami.in/2012/06/27/सावन-भगसावन-में-भगवान-शिव

हिंदू धर्म में चातुर्मास के अर्थ और विवेचना / Meaning and Explanation of Chaturmas in Hindu Dharm

धर्म (मज़हब) किसी एक या अधिक परलौकिक शक्ति में विश्वास और इसके साथ-साथ उसके साथ जुड़ी रिति, रिवाज़, परम्परा, पूजा-पद्धति और दर्शन का समूह है । इस संबंध में प्रोफ़ेसर महावीर सरन जैन का अभिमत है कि आज धर्म के जिस रूप को प्रचारित एवं व्याख्यायित किया जा रहा है उससे बचने की जरूरत है। वास्तव में धर्म संप्रदाय नहीं है। जिंदगी में हमें जो धारण करना चाहिए, वही धर्म है। नैतिक मूल्यों का आचरण ही धर्म है। धर्म वह पवित्र अनुष्ठान है जिससे चेतना का शुद्धिकरण होता है। धर्म वह तत्व है जिसके आचरण से व्यक्ति अपने जीवन को चरितार्थ कर पाता है। यह मनुष्य में मानवीय गुणों के विकास की प्रभावना है, सार्वभौम चेतना का सत्संकल्प है।सनातन धर्म इस विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है सनातन धर्म एक जीवन जीने की पद्धति है जो हमारे ऋषि मुनियों ने मानव केउत्थान के लिए विकसित की  we moved to www.astroswami.in