नरसिंह अवतार
धरा के उद्धार के समय भगवान ने वाराहरूप धारण करके हिरण्याक्ष का वध किया। उसका बड़ा भाई हिरण्यकशिपु बड़ा रुष्ट हुआ। उसने अजेय होने का संकल्प किया। सहस्त्रों वर्ष बिना जल के वह सर्वथा स्थिर तप करता रहा।ब्रह्मा जी सन्तुष्ट हुए। दैत्य को वरदानमिला। उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। लोकपालों को मार भगा दिया। स्वत: सम्पूर्ण लोकों का अधिपति हो गया। देवता निरूपाय थे। असुर को किसी प्रकार वे पराजित नहीं कर सकते थे।.We moved towww.astroswami.in

abbe puraa to likh deta chahiye the mujhe!
ReplyDeleteश्री मान जी,
Deleteकृपया आप www.astroswami.in log in कीजिये आपको अपनी रूचि के अनुसार लेख मिलेंगे
धन्यवाद
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